Friday, April 12, 2024
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Cheque Bounce Rules 2024: चेक बाउंस होने पर कितना लगेगा जुर्माना, मुकदमे की नौबत कब आती है, जानिये पूरी बात

Cheque Bounce Rules 2024: चेक बाउंस को भारत में अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें बैंकों द्वारा पेनल्टी वसूली जाती है। यहाँ तक कि विभिन्न बैंकों में चेक बाउंस की पेनल्टी भिन्न-भिन्न होती है। कुछ विशेष परिस्थितियों में, चेक बाउंस के मामले में आपके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। ऐसे मामलों में, आपको जेल की सजा का सामना भी करना पड़ सकता है। चेक बाउंस को नकदी में नकद किया जाना चाहिए, विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। अगर चेक बाउंस होता है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करना चाहिए। कुछ बैंकों द्वारा पेनल्टी का लागू होना बिना किसी पूर्व सूचना के भी हो सकता है। सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि चेक बाउंस के नतीजे कठिनाईयों का कारण बन सकते हैं।

Cheque Bounce Rules 2024

चेक बाउंस rules in india: आधुनिक युग में लोग अधिकतर ऑनलाइन लेन-देन को पसंद करते हैं, लेकिन कई स्थितियों में चेक भी उपयोगी है। चेक बाउंस होने पर बैंक पेनल्टी लेता है, जिसकी मात्रा बैंक से बैंक भिन्न होती है। चेक बाउंस होने के कई कारण होते हैं, जैसे की धनादेश में कमी या बैंक खाता बंद होना। चेक बाउंस होने पर जुर्माना और क्षतिपूर्ति का प्रावधान होता है, जो बैंक द्वारा वसूला जाता है। ऐसे मामलों में मुकदमा चलाया जा सकता है और व्यक्ति को जेल की सजा हो सकती है। चेक बाउंस की सबसे सामान्य वजह है खाता में पर्याप्त धन होने की कमी। धारा 138 के तहत, चेक बाउंस होने पर कानूनी कार्यवाही हो सकती है। चेक बाउंस होने के मामले में सावधानी बरतना और धन की पर्याप्तता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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ये हैं चेक बाउंस होने के कारण

  • बैलेंस कम होने पर विचार करें, धनराशि का अवलोकन करें और संबंधित निर्णय लें।
  • सिग्नेचर मेल नहीं खाते, यह सुनिश्चित करें कि डॉक्यूमेंट को सही रूप से पहचाना गया है।
  • शब्दों के साथ ध्यान दें, लेखन की त्रुटि को रोकें और वाक्य को सही बनाएं।
  • गलत अकाउंट नंबर को संशोधित करें, सही खाता संख्या को जाँचें और सुनिश्चित करें।
  • ओवर राइटिंग से बचें, महत्वपूर्ण जानकारी को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
  • चेक की समय सीमा का पालन करें, अप्रत्याशित विलंब से बचें और नुकसान से बचाएं।
  • अकाउंट बंद होने से पहले संचालक से संपर्क करें, समस्या का समाधान करें और अप्रत्याशित नुकसान से बचें।
  • जाली चेक के संदेह को जाँचें, अवैध गतिविधियों से बचें और सुरक्षा बढ़ाएं।

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चेक बाउंस Charges -कितना जुर्माना देना होता है

  • चेक बाउंस होने पर बैंक जुर्माना वसूलते हैं, जो चेक जारी करने वाले से वसूला जाता है।
  • यह जुर्माना व्यक्ति की गलती के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। 
  • जुर्माना वसूलने की राशि आमतौर पर 150 से 750 रुपए तक होती है। 
  • कुछ मामलों में, यह जुर्माना 800 रुपए तक बढ़ सकता है।
  • चेक बाउंस होने के कारण व्यक्ति को बैंक के नियमानुसार जुर्माना भुगतान करना पड़ता है। 
  • इसके अलावा, जुर्माना की राशि चेक के अंदर की गई राशि का एक प्रतिशत भी हो सकता है।
  • यदि चेक बाउंस होता है, तो बैंक आमतौर पर बाउंस शुल्क भी वसूलता है।
  • बैंकों के नियमानुसार, चेक बाउंस होने पर खाताधारक को अतिरिक्त धन भरना पड़ सकता है।

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चेक बाउंस को माना जाता है अपराध

भारतीय कानून के अनुसार, चेक बाउंस होना एक गंभीर अपराध माना जाता है। चेक बाउंस नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 के अनुसार, इस अपराध के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस कानून के तहत, चेक बाउंस होने पर व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जा सकता है। मुकदमा चलाने पर व्यक्ति को 2 साल तक की कारावास या चेक की राशि का दोगुना जुर्माना हो सकता है। यह कानूनी प्रक्रिया तभी शुरू होती है जब चेक देने वाले के खाते में पर्याप्त धनराशि न हो। यदि बैंक चेक को डिसॉनर कर देता है, तो भी इस अपराध का मामला चलाया जा सकता है। कानून इसे धनराशि की अभावता के समान मानता है, जो कि चेक का मुख्य उद्देश्य होता है। इस तरह, चेक बाउंस होने पर कानून द्वारा सख्त कार्रवाई की जाती है, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।

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Cheque Bounce Rules 2024कब आती है मुकदमे की नौबत

  • जब चेक बाउंस होता है, तो भुगतानकर्ता पर मुकदमा चलाया जाता है, जिसमें उन्हें नोटिस भेजा जाता है। लेनदार को बैंक से एक रसीद भेजी जाती है, जिसमें चेक बाउंस होने की वजह बताई जाती है। देनदार को 30 दिनों के अंदर नोटिस भेजना होता है, जिसमें उन्हें अवमानित किया जाता है। अगर देनदार का कोई जवाब नहीं आता, तो लेनदार को मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दर्ज करने का हक होता है। शिकायत करने के बाद भी रकम नहीं मिलती, तो देनदार के खिलाफ केस किया जा सकता है। Negotiable Instrument Act 1881 के तहत चेक का बाउंस होना दंडनीय अपराध माना जाता है। यह अपराध दो साल की सजा और जुर्माना के साथ प्रावधानित किया गया है। इसके अलावा, दोनों के लिए सजा और जुर्माना का प्रावधान है।




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